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Shravan Maas 2016 Dates and Vrat

Shravan Maas 2016 Dates and Vrat




Sawan Somwar Vrat Dates for Rajasthan, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Punjab, Himachal Pradesh and Bihar
20
July
(Wednesday)
First day of Shravana Month
25
July
(Monday)
Sawan Somwar Vrat
1
August
(Monday)
Sawan Somwar Vrat
8
August
(Monday)
Sawan Somwar Vrat
15
August
(Monday)
Sawan Somwar Vrat
18
August
(Thursday)
Last day of Shravana Month


Sawan Somwar Vrat Dates for Andhra Pradesh, Goa, Maharashtra, Gujarat, Karnataka and Tamil Nadu
3
August
(Wednesday)
First day of Shravana Month
8
August
(Monday)
Sawan Somwar Vrat
15
August
(Monday)
Sawan Somwar Vrat
22
August
(Monday)
Sawan Somwar Vrat
29
August
(Monday)
Sawan Somwar Vrat
1
September
(Thursday)
Last day of Shravana Month

Shrawan Somvar Katha and Poojan Vidhi

सावन का पूरा महीना यूं तो भगवान शिव को अर्पित होता ही है पर सावन के पहले सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल मिलता है. भारत के सभी द्वादश शिवलिंगों पर इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. आदिकाल से ही इस दिन का विशेष महत्व रहा है. कहा जाता है सावन के सोमवार का व्रत करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और दूध की धार के साथ भगवान शिव से जो मांगो वह वर मिल जाता है.

सावन के सोमवार की महिमा अपार है और इसीलिए हम आपके लिए सोमवार के व्रत की कथा और उसके पूजन की विधि को लेकर आएं हैं.

सावन के सोमवार के व्रत की कथा :-

एक कथा के अनुसार जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो महादेव भगवान शिव ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था. अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया. पार्वती ने सावन के महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया. यही कारण है कि सावन के महीने में सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए कुंवारी लड़कियों व्रत रखती हैं.

सोमवार व्रत विधि :-

सोमवार व्रत में भगवान भगवान शंकर के साथ माता पार्वती और श्री गणेश की भी पूजा की जाती है. व्रती यथाशक्ति पंचोपचार या षोडशोपचार विधि-विधान और पूजन सामग्री से पूजा कर सकता है. व्रत स्त्री-पुरुष दोनों कर सकते हैं. शास्त्रों के मुताबिक सोमवार व्रत की अवधि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक है. सोमवार व्रत में उपवास रखना श्रेष्ठ माना जाता है, किंतु उपवास न करने की स्थिति में व्रती के लिए सूर्यास्त के बाद शिव पूजा के बाद एक बार भोजन करने का विधान है. सोमवार व्रत एक भुक्त और रात्रि भोजन के कारण नक्तव्रत भी कहलाता है.
सावन के पहले सोमवार की पूजा विधि :-

प्रात: और सांयकाल स्नान के बाद शिव के साथ माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय और नंदी जी पूजा करें. चतुर्थी तिथि होने से श्री गणेश की भी विशेष पूजा करें. पूजा में मुख पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की ओर रखें. पूजा के दौरान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नम: शिवाय” और गणेश मंत्र जैसे “ॐ गं गणपतये” बोलकर भी पूजा सामग्री अर्पित कर सकते हैं.

पूजा में शिव परिवार को पंचामृत यानी दूध, दही, शहद, शक्कर, घी व जलधारा से स्नान कराकर, गंध, चंदन, फूल, रोली, वस्त्र अर्पित करें. शिव को सफेद फूल, बिल्वपत्र, सफेद वस्त्र और श्री गणेश को सिंदूर, दूर्वा, गुड़ व पीले वस्त्र चढ़ाएं. भांग-धतूरा भी शिव पूजा में चढ़ाएं. शिव को सफेद रंगे के पकवानों और गणेश को मोदक यानी लड्डूओं का भोग लगाएं.

भगवान शिव व गणेश के जिन स्त्रोतों, मंत्र और स्तुति की जानकारी हो, उसका पाठ करें. श्री गणेश व शिव की आरती सुगंधित धूप, घी के पांच बत्तियों के दीप और कर्पूर से करें. अंत में गणेश और शिव से घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामनाएं करें.